बच्चों के लिए धार्मिक कथाएँ · देवनागरी पाठ

ध्रुव की दृढ़ भक्ति

बच्चों के लिए सरल हिन्दी कथारूपान्तरण।

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स्रोत: स्रोत-सन्दर्भ सहित Divyadindarshan का हिन्दी रूपान्तरण · संदर्भ पाठ

ध्रुव की दृढ़ भक्ति — हिन्दी रूपान्तरण

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ध्रुव छोटे थे। एक दिन पिता के पास बैठने से रोके जाने पर उन्हें बहुत दुख हुआ। वे अपनी माता सुनीति के पास गए। माता ने उनके मन में किसी के लिए कटुता नहीं भरी। उन्होंने भगवान को स्मरण करने और अपने मन को सँभालने की प्रेरणा दी। ध्रुव वन की ओर चले तो नारद मिले। उन्होंने बालक से बातें कीं, उसकी दृढ़ता समझी और भक्ति का मार्ग बताया। ध्रुव ने ध्यान और प्रार्थना में मन लगाया। उनका मन धीरे-धीरे अपमान से हटकर भगवान की ओर लग गया। विष्णु ने दर्शन दिए तो ध्रुव की खुशी किसी बड़े सिंहासन को पाने से अधिक थी। जिन्हें वे अपनी इच्छा पूरी करने के लिए खोज रहे थे, उनके दर्शन से उनकी इच्छा ही बदल गई। बाद में उन्हें परिवार के पास लौटकर अपना कर्तव्य निभाने का आशीर्वाद मिला। ध्रुवपद उनकी अटल भक्ति का प्रतीक बन गया। बच्चे इस कथा से धैर्य और मन की दिशा बदलने की सीख ले सकते हैं। दुख होने पर किसी भरोसेमन्द बड़े से बात करना भी अच्छा पहला कदम है।
स्रोत और पाठ-संस्करण

Divyadindarshan का स्वतन्त्र हिन्दी रूपान्तरण; उद्धृत स्रोतों के प्रसंग/परम्परा पर आधारित। https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83_%E0%A5%AA/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%AE&oldid=353504 https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83_%E0%A5%AA/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%AF&oldid=367143