बच्चों के लिए धार्मिक कथाएँ · देवनागरी पाठ

कालिया नाग की कथा

बच्चों के लिए सरल हिन्दी कथारूपान्तरण।

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स्रोत: स्रोत-सन्दर्भ सहित Divyadindarshan का हिन्दी रूपान्तरण · संदर्भ पाठ

कालिया नाग की कथा — हिन्दी रूपान्तरण

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वृन्दावन के पास यमुना के एक भाग में कालिया नाग रहता था। उसके विष से जल दूषित हो गया था। पशु-पक्षियों और व्रजवासियों को उससे संकट था। कृष्ण ने उस स्थान में प्रवेश किया। कालिया ने उन्हें अपने फनों में जकड़ लिया। किनारे खड़े लोगों को बहुत चिन्ता हुई। कृष्ण ने अपने को छुड़ाया और कालिया के फनों पर खड़े हो गए। कथा में उनके नृत्य से नाग का अभिमान टूटता है। कालिया की पत्नियों ने भगवान से उसे क्षमा करने की प्रार्थना की। कृष्ण ने उसे जीवनदान दिया और यमुना छोड़कर समुद्र की ओर जाने को कहा। उन्होंने व्रज और जलचर जीवों के लिए जल को सुरक्षित किया। नाग अपने परिवार के साथ वहाँ से चला गया और यमुना का वह भाग फिर उपयोग योग्य हुआ। कहानी में शक्ति का अन्त केवल दण्ड देना नहीं है। गलती रोकना, क्षमा देना और सबके रहने की जगह को सुरक्षित बनाना भी महत्त्वपूर्ण है। वास्तविक जीवन में विषैले जीव या दूषित जल के पास स्वयं न जाएँ; बड़े लोगों को बताएँ।
स्रोत और पाठ-संस्करण

Divyadindarshan का स्वतन्त्र हिन्दी रूपान्तरण; उद्धृत स्रोतों के प्रसंग/परम्परा पर आधारित। https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83_%E0%A5%A7%E0%A5%A6/%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%A7%E0%A5%AC&oldid=200068 https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83_%E0%A5%A7%E0%A5%A6/%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%A7%E0%A5%AD&oldid=200069