बच्चों के लिए धार्मिक कथाएँ · देवनागरी पाठ

गोवर्धन उठाने की कथा

बच्चों के लिए सरल हिन्दी कथारूपान्तरण।

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स्रोत: स्रोत-सन्दर्भ सहित Divyadindarshan का हिन्दी रूपान्तरण · संदर्भ पाठ

गोवर्धन उठाने की कथा — हिन्दी रूपान्तरण

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व्रज में सब मिलकर उत्सव की तैयारी कर रहे थे। कृष्ण ने कहा कि उनकी गायों को घास देने वाला गोवर्धन और जीवन सँभालने वाला वन भी उनके आभार के पात्र हैं। लोगों ने भोजन बनाया, गौओं का सम्मान किया और गोवर्धन की पूजा की। इन्द्र को लगा कि उनका सम्मान नहीं हुआ। उन्होंने बहुत तेज वर्षा भेजी। लोग और पशु डर गए। कृष्ण ने उन्हें धैर्य दिया और गोवर्धन पर्वत उठाकर उसके नीचे आश्रय दिया। सब एक साथ सुरक्षित स्थान पर आ गए। कथा कहती है कि सात दिन तक लोग पर्वत के नीचे रहे। वे एक-दूसरे का साथ देते रहे। अन्त में इन्द्र को अपनी भूल समझ आई। वर्षा बन्द हुई और सब बाहर निकले। कृष्ण ने पर्वत फिर अपने स्थान पर रख दिया। कहानी हमें याद दिलाती है कि संकट में केवल अपनी चिन्ता नहीं करनी चाहिए। बच्चों, बड़ों और पशुओं—सबको आश्रय चाहिए। हमारी सहायता करने वाली प्रकृति के प्रति कृतज्ञ रहना और कठिन समय में साथ देना इस कथा की सुन्दर सीख है।
स्रोत और पाठ-संस्करण

Divyadindarshan का स्वतन्त्र हिन्दी रूपान्तरण; उद्धृत स्रोतों के प्रसंग/परम्परा पर आधारित। https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83_%E0%A5%A7%E0%A5%A6/%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%A8%E0%A5%AA&oldid=183696 https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83_%E0%A5%A7%E0%A5%A6/%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%A8%E0%A5%AB&oldid=97324