बच्चों के लिए धार्मिक कथाएँ · देवनागरी पाठ

बाल कृष्ण और माखन की कथा

बच्चों के लिए सरल हिन्दी कथारूपान्तरण।

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स्रोत: स्रोत-सन्दर्भ सहित Divyadindarshan का हिन्दी रूपान्तरण · संदर्भ पाठ

बाल कृष्ण और माखन की कथा — हिन्दी रूपान्तरण

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गोकुल में कृष्ण और उनके सखा खेलते रहते थे। गोपियाँ कभी हँसते हुए, कभी उलाहना देते हुए यशोदा से कहतीं कि उनका लाला माखन की मटकी तक पहुँच जाता है। ऊँची रखी मटकी के लिए बच्चे मिलकर उपाय सोचते। कृष्ण माखन बन्दरों तक को बाँट देते। यशोदा शिकायतें सुनतीं और अपने नटखट बालक को समझातीं। एक दिन यशोदा दही मथ रही थीं। कृष्ण उनके पास आए। माँ दूसरे काम में लगीं तो बालक रूठ गए। आगे मटकी टूटने और माखन बाँटने का प्रसंग हुआ। यशोदा उन्हें पकड़ने दौड़ीं। कृष्ण भागे, लेकिन अन्त में माँ के स्नेह के सामने रुक गए। यशोदा उन्हें ऊखल से बाँधना चाहती थीं। जितनी रस्सी जोड़तीं, वह थोड़ी छोटी रह जाती। आखिर बालक ने माँ के प्रेम और परिश्रम को देखकर बँधना स्वीकार किया। इसी लीला से दामोदर नाम जुड़ता है। इस बाललीला में भगवान को भी माँ की देखभाल में रहने वाले बच्चे के रूप में देखा जाता है। कहानी का आनन्द स्नेह और नटखटपन में है; अपने घर में किसी की चीज लेने से पहले पूछना और सबके साथ बाँटना अच्छी आदत है।
स्रोत और पाठ-संस्करण

Divyadindarshan का स्वतन्त्र हिन्दी रूपान्तरण; उद्धृत स्रोतों के प्रसंग/परम्परा पर आधारित। https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83_%E0%A5%A7%E0%A5%A6/%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%AE&oldid=200077 https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83_%E0%A5%A7%E0%A5%A6/%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%AF&oldid=200078