बच्चों के लिए धार्मिक कथाएँ · देवनागरी पाठ
केवट और श्रीराम
बच्चों के लिए सरल हिन्दी कथारूपान्तरण।
स्रोत: स्रोत-सन्दर्भ सहित Divyadindarshan का हिन्दी रूपान्तरण · संदर्भ पाठ
केवट और श्रीराम — हिन्दी रूपान्तरण
राम, सीता और लक्ष्मण वनयात्रा में नदी के किनारे पहुँचे। उन्हें पार जाने के लिए नाव की आवश्यकता थी। रामचरितमानस में केवट राम के चरण धोने की प्रार्थना करता है। वह विनोद से कहता है कि जिन चरणों के स्पर्श से पत्थर नारी बन गया, कहीं उनकी धूल से उसकी नाव भी बदल न जाए।
राम उसकी भक्ति और सरल विनोद पर प्रसन्न हुए। केवट ने चरण धोए और सबको अपनी नाव में बैठाकर नदी पार पहुँचाया। उसके लिए यह केवल काम नहीं, प्रिय अतिथि की सेवा थी।
पार उतरने पर उसे पारिश्रमिक देना चाहा गया। केवट ने विनम्रता से अपनी भक्ति की भावना रखी और सेवा करके प्रसन्न हुआ। राम ने उसके प्रेम का सम्मान किया।
यह तुलसीदास के मानस का प्रसिद्ध भक्तिपूर्ण प्रसंग है। कथा में केवट की इच्छा, उसका विनोद और उसका सम्मान—तीनों महत्त्वपूर्ण हैं। सेवा किसी को छोटा नहीं बनाती; स्नेह के साथ एक-दूसरे का आदर करने से सम्बन्ध सुन्दर बनता है।
स्रोत और पाठ-संस्करण
Divyadindarshan का स्वतन्त्र हिन्दी रूपान्तरण; उद्धृत स्रोतों के प्रसंग/परम्परा पर आधारित। https://app.unpkg.com/hindu-devotional-texts@0.7.0/files/src/scriptures/ramcharitmanas/ayodhya-kand.ts