बच्चों के लिए धार्मिक कथाएँ · देवनागरी पाठ

गिलहरी का रामसेतु

बच्चों के लिए सरल हिन्दी कथारूपान्तरण।

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स्रोत: स्रोत-सन्दर्भ सहित Divyadindarshan का हिन्दी रूपान्तरण · संदर्भ पाठ

गिलहरी का रामसेतु — हिन्दी रूपान्तरण

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रामसेतु की एक लोकप्रचलित कथा में वानर बड़े पत्थर लाकर पुल बना रहे थे। एक छोटी गिलहरी भी सहायता करना चाहती थी। वह पानी में जाती, रेत अपने शरीर पर लगाती और पुल के पास झाड़ देती। उसकी सहायता देखने में बहुत छोटी लगती थी। किसी ने उसकी छोटी-सी कोशिश पर ध्यान दिया। कथा के अलग रूपों में वानरों का आश्चर्य या उपहास भी आता है। राम ने गिलहरी की लगन का आदर किया। उसके लिए काम का आकार नहीं, सेवा की सच्ची इच्छा महत्त्वपूर्ण थी। लोककथा में राम गिलहरी की पीठ पर हाथ फेरते हैं और उसकी धारियों को उस स्नेह की स्मृति कहा जाता है। यह वाल्मीकि रामायण के सेतुबन्ध अध्याय का शब्दशः प्रसंग नहीं, बाद की लोकप्रिय कथापरम्परा है। कहानी का भाव सरल है: बड़े काम में छोटी सहायता भी स्वागत योग्य है। घर या विद्यालय में कोई छोटा साथी मदद करना चाहे तो उसे हँसकर रोकने के बजाय उसके लिए सुरक्षित और उचित काम खोजा जा सकता है।
स्रोत और पाठ-संस्करण

Divyadindarshan का स्वतन्त्र हिन्दी रूपान्तरण; उद्धृत स्रोतों के प्रसंग/परम्परा पर आधारित। https://en.wikisource.org/w/index.php?title=The_Complete_Works_of_Swami_Vivekananda/Volume_4/Lectures_and_Discourses/The_Ramayana&oldid=12611926