बच्चों के लिए धार्मिक कथाएँ · देवनागरी पाठ

प्रह्लाद का विश्वास

बच्चों के लिए सरल हिन्दी कथारूपान्तरण।

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स्रोत: स्रोत-सन्दर्भ सहित Divyadindarshan का हिन्दी रूपान्तरण · संदर्भ पाठ

प्रह्लाद का विश्वास — हिन्दी रूपान्तरण

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प्रह्लाद के पिता हिरण्यकशिपु बहुत शक्तिशाली थे। वे चाहते थे कि सब उन्हीं को सबसे बड़ा मानें। प्रह्लाद भगवान विष्णु को याद करते और दूसरों से भी प्रेम की बात करते थे। पिता का क्रोध देखकर भी उन्होंने घृणा करना नहीं सीखा। एक दिन पिता ने पूछा कि तुम्हारे भगवान कहाँ हैं। प्रह्लाद बोले कि वे हर जगह हैं। राजा ने सामने के खम्भे पर प्रहार किया। कथा में उसी स्तम्भ से भगवान नरसिंह का अद्भुत रूप प्रकट हुआ। नरसिंह ने अत्याचार को रोका। प्रह्लाद उनके पास गए और विनम्रता से प्रार्थना की। उन्होंने अपने पिता के कल्याण की भी इच्छा की। इसलिए उनका विश्वास केवल निर्भय होने में नहीं, करुणा बनाए रखने में भी दिखाई देता है। यह कहानी शक्ति के घमण्ड और भक्ति के सरल विश्वास का अन्तर दिखाती है। किसी बड़े के गलत व्यवहार से बच्चा दुखी हो तो उसे चुपचाप अकेले सहना नहीं चाहिए; किसी सुरक्षित और भरोसेमन्द बड़े की मदद लेनी चाहिए।
स्रोत और पाठ-संस्करण

Divyadindarshan का स्वतन्त्र हिन्दी रूपान्तरण; उद्धृत स्रोतों के प्रसंग/परम्परा पर आधारित। https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83_%E0%A5%AD/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%AE&oldid=333787 https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83_%E0%A5%AD/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%AF&oldid=333788