बच्चों के लिए धार्मिक कथाएँ · देवनागरी पाठ

सावित्री का साहस

बच्चों के लिए सरल हिन्दी कथारूपान्तरण।

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स्रोत: स्रोत-सन्दर्भ सहित Divyadindarshan का हिन्दी रूपान्तरण · संदर्भ पाठ

सावित्री का साहस — हिन्दी रूपान्तरण

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सावित्री ने सत्यवान को जीवनसाथी चुना। वे गुणवान थे और वन में अपने माता-पिता के साथ रहते थे। जब सावित्री को कठिन भविष्य का समाचार मिला, तो वे भय के कारण दूसरों से कट नहीं गईं। उन्होंने धैर्य से अपने परिवार की देखभाल की। एक दिन वन में सत्यवान अस्वस्थ हुए। कथा में यम उनके प्राण लेकर चलते हैं और सावित्री उनके पीछे जाती हैं। वे क्रोध या छल से नहीं, विचारपूर्ण और विनम्र शब्दों से बात करती हैं। यम उनके विवेक से प्रसन्न होकर वर देते हैं। सावित्री परिवार के कल्याण की कामना करती हैं। अन्त में सत्यवान से अपनी सन्तति का वर मिलने पर उनके जीवन की वापसी का मार्ग खुलता है। सत्यवान जागते हैं और दोनों आश्रम लौटते हैं। सावित्री का साहस केवल निडर दिखने में नहीं है। कठिन समय में ध्यान बनाए रखना, उचित बात कहना और अपने प्रियजनों के लिए समझदारी से प्रयत्न करना भी साहस है।
स्रोत और पाठ-संस्करण

Divyadindarshan का स्वतन्त्र हिन्दी रूपान्तरण; उद्धृत स्रोतों के प्रसंग/परम्परा पर आधारित। https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%AE%E0%A5%8D-03-%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%95%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5-297&oldid=51958 https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%AE%E0%A5%8D-03-%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%95%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5-298&oldid=402190 https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%AE%E0%A5%8D-03-%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%95%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5-299&oldid=51963