बच्चों के लिए धार्मिक कथाएँ · देवनागरी पाठ
राम और शबरी
बच्चों के लिए सरल हिन्दी कथारूपान्तरण।
स्रोत: स्रोत-सन्दर्भ सहित Divyadindarshan का हिन्दी रूपान्तरण · संदर्भ पाठ
राम और शबरी — हिन्दी रूपान्तरण
वन में शबरी अपने गुरु के आश्रम में रहती थीं। वे श्रद्धा से सेवा करतीं और राम के आने की प्रतीक्षा करती थीं। गुरु के चले जाने के बाद भी उन्होंने आश्रम की देखभाल और अपने विश्वास को बनाए रखा।
राम और लक्ष्मण सीता की खोज में वहाँ पहुँचे। शबरी ने उनका आदरपूर्वक स्वागत किया और वन के फल अर्पित किए। राम ने उनका स्नेह स्वीकार किया। आश्रम और ऋषियों की साधना से जुड़े स्थान देखकर उन्होंने शबरी की श्रद्धा का सम्मान किया।
बेरों को चखकर देने का विवरण लोकपरम्परा और अनेक बाद के कथनों में मिलता है। वाल्मीकि रामायण के इस प्रसंग में मुख्य बात आदरपूर्ण आतिथ्य और भक्ति है; इसलिए उस विवरण को सभी मूल संस्करणों का शब्दशः प्रसंग नहीं कहना चाहिए।
इस कथा में किसी का सम्मान उसके वस्त्र, धन या सामाजिक पहचान से नहीं किया जाता। छोटा घर और साधारण भेंट भी प्रेम तथा आदर के कारण मूल्यवान हो सकते हैं।
स्रोत और पाठ-संस्करण
Divyadindarshan का स्वतन्त्र हिन्दी रूपान्तरण; उद्धृत स्रोतों के प्रसंग/परम्परा पर आधारित। https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%85%E0%A4%B0%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%A1%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%97%E0%A4%83_%E0%A5%AD%E0%A5%AA&oldid=352122