पुराण कथा · देवनागरी पाठ

राजा हरिश्चंद्र की कथा

स्रोताधारित हिन्दी कथारूपान्तरण। मूल ग्रन्थ के प्रसंग और इस संस्करण का सन्दर्भ साथ दिया गया है।

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स्रोत: मूल ग्रन्थ-सन्दर्भ सहित Divyadindarshan का हिन्दी कथारूपान्तरण · संदर्भ पाठ

राजा हरिश्चंद्र की कथा — हिन्दी कथारूपान्तरण

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राजा हरिश्चन्द्र अपनी सत्यनिष्ठा के लिए प्रसिद्ध थे। मार्कण्डेयपुराण के कथानक में विश्वामित्र के साथ हुए प्रसंग और दान के वचन के कारण उन्हें राज्य तथा सम्पत्ति छोड़नी पड़ी। दक्षिणा का दायित्व फिर भी शेष था। पत्नी और पुत्र के साथ राजा कठिन परिस्थितियों में पहुँचे। वचन पूरा करने के लिए उन्होंने अत्यन्त पीड़ादायक परिस्थितियाँ स्वीकार कीं। परिवार अलग हुआ। राजा को श्मशान में काम करना पड़ा, जहाँ उनका दायित्व निर्धारित शुल्क लेकर अन्त्येष्टि की अनुमति देना था। राजसुख से दूर रहकर भी वे अपने कर्तव्य को निभाने का प्रयास करते रहे। एक दिन उनकी पत्नी अपने मृत पुत्र को लेकर वहाँ आईं। पिता और पति के रूप में उनका शोक बहुत गहरा था, पर सामने नौकरी का नियम भी था। कथा इसी असहनीय द्वन्द्व में सत्य और कर्तव्य की परीक्षा को चरम तक ले जाती है। यह दुख को छोटा या सरल बताने वाला प्रसंग नहीं है। अन्ततः देवता और ऋषि प्रकट हुए। परीक्षा का प्रसंग स्पष्ट हुआ, परिवार को पुनः जीवन और मिलन मिला तथा राजा की सत्यनिष्ठा का सम्मान हुआ। हरिश्चन्द्र ने केवल अपने सुख की चिन्ता नहीं की; प्रजा से उनका सम्बन्ध भी कथा के अन्त में महत्त्व पाता है। लोक में यह कथा विपत्ति में भी सत्य और करुणा का प्रश्न जीवित रखने के लिए सुनाई जाती है।
स्रोत और पाठ-संस्करण

स्रोताधारित स्वतन्त्र हिन्दी रूपान्तरण; मूल श्लोकों का अक्षरशः अनुवाद नहीं। https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%A1%E0%A5%87%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%A6%E0%A5%A6%E0%A5%AD&oldid=117744 https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%A1%E0%A5%87%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%A6%E0%A5%A6%E0%A5%AE&oldid=117743