पुराण कथा · देवनागरी पाठ

गजेंद्र मोक्ष की कथा

स्रोताधारित हिन्दी कथारूपान्तरण। मूल ग्रन्थ के प्रसंग और इस संस्करण का सन्दर्भ साथ दिया गया है।

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स्रोत: मूल ग्रन्थ-सन्दर्भ सहित Divyadindarshan का हिन्दी कथारूपान्तरण · संदर्भ पाठ

गजेंद्र मोक्ष की कथा — हिन्दी कथारूपान्तरण

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त्रिकूट पर्वत के वन में एक शक्तिशाली हाथी अपने समूह के साथ रहता था। एक दिन वह प्यास बुझाने और जलक्रीड़ा के लिए सरोवर में उतरा। तभी एक मगर ने उसका पैर पकड़ लिया। गजेन्द्र ने अपने बल से छूटने का बहुत प्रयत्न किया। साथ के हाथियों ने भी सहायता की, पर पकड़ नहीं छूटी। लम्बे संघर्ष में जल में रहने वाला मगर और बलवान होता गया, जबकि गजेन्द्र की शक्ति घटती गई। जब उसे लगा कि अपना बल और साथियों की सहायता अब पर्याप्त नहीं है, तब उसके भीतर पूर्व साधना का स्मरण जागा। उसने परम आश्रय को पुकारा। यह पुकार किसी सांसारिक वस्तु के लिए नहीं, बन्धन से मुक्ति और शरण के लिए थी। गजेन्द्र ने सूँड़ में कमल लेकर भगवान का स्मरण किया। विष्णु गरुड़ पर आरूढ़ होकर आए और उसे संकट से मुक्त किया। भागवत आगे दोनों पात्रों के पूर्वजन्म का प्रसंग भी कहता है: गजेन्द्र राजा इन्द्रद्युम्न और मगर हूहू नामक गन्धर्व से सम्बन्धित शाप के कारण इन रूपों में थे। भगवान की कृपा से उनका बन्धन समाप्त हुआ। गजेन्द्र की कथा में भक्ति का स्वर निर्बलता का उपहास नहीं करता। वह यह दिखाता है कि केवल बाहरी शक्ति पर आधारित अभिमान टूटने पर भी आश्रय और प्रार्थना का द्वार खुला रहता है।
स्रोत और पाठ-संस्करण

स्रोताधारित स्वतन्त्र हिन्दी रूपान्तरण; मूल श्लोकों का अक्षरशः अनुवाद नहीं। https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83_%E0%A5%AE/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%A8&oldid=108659 https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83_%E0%A5%AE/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%A9&oldid=342572 https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83_%E0%A5%AE/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%AA&oldid=342573