पुराण कथा · देवनागरी पाठ

तुलसी और शालिग्राम की कथा

स्रोताधारित हिन्दी कथारूपान्तरण। मूल ग्रन्थ के प्रसंग और इस संस्करण का सन्दर्भ साथ दिया गया है।

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स्रोत: मूल ग्रन्थ-सन्दर्भ सहित Divyadindarshan का हिन्दी कथारूपान्तरण · संदर्भ पाठ

तुलसी और शालिग्राम की कथा — हिन्दी कथारूपान्तरण

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देवीभागवत के तुलसी-प्रसंग में तुलसी और शंखचूड़ की कथा आती है। शंखचूड़ के रक्षाकवच और तुलसी की निष्ठा के कारण उसे परास्त करना कठिन था। देवताओं और असुरों के संघर्ष में विष्णु ने ऐसा रूप धारण किया जिससे तुलसी को भ्रम हुआ। वास्तविकता जानकर तुलसी बहुत व्यथित हुईं। उन्होंने विष्णु को अपने साथ हुए छल के लिए पत्थर रूप में रहने का शाप दिया। इस प्रसंग को केवल आशीर्वाद की सरल कथा बनाकर उसके दुख और विरोध को मिटा देना उचित नहीं है। पुराण में तुलसी का अपनी पीड़ा व्यक्त करना कथानक का महत्त्वपूर्ण भाग है। विष्णु ने उन्हें दिव्य स्थान का आश्वासन दिया। उनके पृथ्वी पर तुलसी-वृक्ष के रूप में पूजित होने और गण्डकी नदी से सम्बन्ध की बात कही गई। शालिग्राम शिला विष्णु की पूजा में प्रतिष्ठित हुई और तुलसीपत्र उनके पूजन से जुड़ा। आगे तुलसी के पवित्र स्वरूप, शालिग्राम के लक्षण और पूजा का माहात्म्य वर्णित है। तुलसी-विवाह की लोकपरम्परा में इस सम्बन्ध का मंगलोत्सव मनाया जाता है। अलग पुराणों और क्षेत्रों में वृन्दा, जालन्धर, तुलसी और शंखचूड़ के प्रसंगों के पाठांतर मिलते हैं; इस रूपान्तरण में देवीभागवत का तुलसी-शंखचूड़ वाला कथानक रखा गया है।
स्रोत और पाठ-संस्करण

स्रोताधारित स्वतन्त्र हिन्दी रूपान्तरण; मूल श्लोकों का अक्षरशः अनुवाद नहीं। https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%80%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83_%E0%A5%A6%E0%A5%AF/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%A8%E0%A5%AA&oldid=75096