पुराण कथा · देवनागरी पाठ

वामन अवतार की कथा

स्रोताधारित हिन्दी कथारूपान्तरण। मूल ग्रन्थ के प्रसंग और इस संस्करण का सन्दर्भ साथ दिया गया है।

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स्रोत: मूल ग्रन्थ-सन्दर्भ सहित Divyadindarshan का हिन्दी कथारूपान्तरण · संदर्भ पाठ

वामन अवतार की कथा — हिन्दी कथारूपान्तरण

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राजा बलि ने अपने पराक्रम और यज्ञों से व्यापक अधिकार प्राप्त किया था। वे दानी भी थे। अदिति की प्रार्थना पर विष्णु वामन ब्रह्मचारी के रूप में प्रकट हुए और बलि के यज्ञ में पहुँचे। तेजस्वी अतिथि का राजा ने आदर किया और उनसे वर माँगने को कहा। वामन ने केवल तीन पग भूमि माँगी। बलि को यह माँग छोटी लगी। गुरु शुक्राचार्य ने चेतावनी दी कि यह साधारण बालक नहीं, विष्णु हैं और इनकी माँग से राज्य जा सकता है। बलि ने सोचा कि दिया हुआ वचन वापस लेना उचित नहीं होगा। उन्होंने संकल्प कर दान स्वीकार किया। वामन ने विराट रूप धारण किया। एक पग में पृथ्वी और दूसरे में ऊर्ध्वलोक नाप लिए। तीसरे पग के लिए स्थान पूछा गया तो बलि ने अपना सिर प्रस्तुत किया। बाहरी सम्पत्ति छिन जाने पर भी उनका दान का संकल्प और समर्पण बना रहा। भगवान ने बलि की सत्यनिष्ठा की प्रशंसा की और उन्हें सुतल में स्थान तथा अपना संरक्षण दिया। यह कथा बलि को केवल पराजित प्रतिद्वन्द्वी बनाकर नहीं छोड़ती। उसमें सत्ता का परिवर्तन, वचन की परीक्षा और अहंकार से परे उदारता—तीनों साथ हैं।
स्रोत और पाठ-संस्करण

स्रोताधारित स्वतन्त्र हिन्दी रूपान्तरण; मूल श्लोकों का अक्षरशः अनुवाद नहीं। https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83_%E0%A5%AE/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%A7%E0%A5%AE&oldid=342578 https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83_%E0%A5%AE/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%A7%E0%A5%AF&oldid=106478 https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83_%E0%A5%AE/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%A8%E0%A5%A8&oldid=106480