पुराण कथा · देवनागरी पाठ

गोवर्धन पूजा की कथा

स्रोताधारित हिन्दी कथारूपान्तरण। मूल ग्रन्थ के प्रसंग और इस संस्करण का सन्दर्भ साथ दिया गया है।

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स्रोत: मूल ग्रन्थ-सन्दर्भ सहित Divyadindarshan का हिन्दी कथारूपान्तरण · संदर्भ पाठ

गोवर्धन पूजा की कथा — हिन्दी कथारूपान्तरण

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व्रज में वर्षा के लिए इन्द्र की पूजा की तैयारी थी। बालकृष्ण ने नन्द और गोपों से प्रश्न किया कि उनके जीवन का आधार क्या है। उन्होंने गौ, वन, गोचरभूमि और गोवर्धन के महत्त्व पर ध्यान दिलाया। कृष्ण के सुझाव पर व्रजवासियों ने गोवर्धन, गौ और अपने समुदाय के पालन में सहायक साधनों के प्रति कृतज्ञता प्रकट की। इन्द्र ने इसे अपना अपमान माना और भीषण वर्षा भेजी। जब व्रज संकट में आया, कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर सबको उसके नीचे आश्रय दिया। गोप, गोपियाँ, बच्चे और पशु साथ रहे। कथा के अनुसार सात दिन तक यह आश्रय बना रहा। इन्द्र को समझ आया कि क्रोध और पद का अभिमान उन्हें अनुचित कार्य की ओर ले गया। उन्होंने वर्षा रुकवाई। संकट समाप्त होने पर सब बाहर आए और कृष्ण ने पर्वत अपने स्थान पर रख दिया। आगे इन्द्र और सुरभि द्वारा कृष्ण के अभिषेक का प्रसंग गोविन्द नाम से जुड़ता है। इस कथा में पर्वत उठाने के चमत्कार के साथ समुदाय की रक्षा और प्रकृति से मिलने वाले पोषण का स्मरण भी है। पूजा का आशय केवल भयवश प्रसन्न करना नहीं, जीवन को सम्भव बनाने वाले सम्बन्धों के प्रति कृतज्ञ होना भी बताया गया है।
स्रोत और पाठ-संस्करण

स्रोताधारित स्वतन्त्र हिन्दी रूपान्तरण; मूल श्लोकों का अक्षरशः अनुवाद नहीं। https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83_%E0%A5%A7%E0%A5%A6/%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%A8%E0%A5%AA&oldid=183696 https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83_%E0%A5%A7%E0%A5%A6/%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%A8%E0%A5%AB&oldid=97324