पुराण कथा · देवनागरी पाठ

मत्स्य अवतार की कथा

स्रोताधारित हिन्दी कथारूपान्तरण। मूल ग्रन्थ के प्रसंग और इस संस्करण का सन्दर्भ साथ दिया गया है।

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स्रोत: मूल ग्रन्थ-सन्दर्भ सहित Divyadindarshan का हिन्दी कथारूपान्तरण · संदर्भ पाठ

मत्स्य अवतार की कथा — हिन्दी कथारूपान्तरण

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राजा सत्यव्रत जल से अर्घ्य दे रहे थे। उनकी अंजलि में एक छोटी मछली आ गई। मछली ने बड़े जलचरों से रक्षा की प्रार्थना की। राजा ने उसे अपने पात्र में रखा। वह शीघ्र बड़ी हो गई, इसलिए उसे बड़े पात्र, सरोवर और फिर समुद्र तक ले जाना पड़ा। असाधारण वृद्धि देखकर सत्यव्रत समझ गए कि यह साधारण जीव नहीं है। भगवान ने मत्स्य रूप में उन्हें आने वाले प्रलय का समाचार दिया। उन्होंने बताया कि एक नौका आएगी। उसमें सप्तर्षियों, बीजों और आवश्यक जीवधारक तत्त्वों को लेकर बैठना है, ताकि सृष्टि का क्रम फिर आगे बढ़ सके। प्रलय का जल फैला तो सत्यव्रत ने निर्देश के अनुसार नौका में आश्रय लिया। मत्स्य का विशाल रूप प्रकट हुआ। वासुकि की सहायता से नौका उनके सींग से बाँधी गई। भगवान ने मार्गदर्शन किया और ऋषियों को ज्ञान दिया। कथा में वेदों के पुनः संरक्षण का प्रसंग भी जुड़ा है। सत्यव्रत आगे वैवस्वत मनु के रूप में सृष्टि के नए क्रम से सम्बन्धित हुए। मत्स्य कथा छोटी सहायता से आरम्भ होकर व्यापक संरक्षण तक पहुँचती है। जीवों, ज्ञान और भविष्य की सम्भावनाओं को बचाना इसका प्रमुख सूत्र है।
स्रोत और पाठ-संस्करण

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