पुराण कथा · देवनागरी पाठ

वराह अवतार की कथा

स्रोताधारित हिन्दी कथारूपान्तरण। मूल ग्रन्थ के प्रसंग और इस संस्करण का सन्दर्भ साथ दिया गया है।

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स्रोत: मूल ग्रन्थ-सन्दर्भ सहित Divyadindarshan का हिन्दी कथारूपान्तरण · संदर्भ पाठ

वराह अवतार की कथा — हिन्दी कथारूपान्तरण

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सृष्टि के आरम्भिक प्रसंग में पृथ्वी जलराशि के भीतर डूबी हुई थी। ब्रह्मा चिन्तित थे कि प्राणियों के निवास का आधार कैसे स्थापित होगा। उसी समय भगवान का वराह रूप प्रकट हुआ। छोटा दिखाई देने वाला वह रूप शीघ्र विराट हो गया और ऋषियों ने उसे पहचानकर स्तुति की। वराह ने गर्जना करते हुए जल में प्रवेश किया। उन्होंने पृथ्वी को खोजा और अपने दाँतों पर उठाया। पुराण के आगे के वर्णन में हिरण्याक्ष नामक असुर उन्हें युद्ध की चुनौती देता है। वह अपने बल से उद्धत था और भगवान के कार्य में बाधा बनता है। दोनों के युद्ध का वर्णन विस्तृत है। अन्ततः वराह ने हिरण्याक्ष को परास्त किया और पृथ्वी को सुरक्षित स्थिति में स्थापित किया। देवताओं और ऋषियों ने भगवान की स्तुति की। भागवत इस रूप को यज्ञमय भी कहता है और उसके अंगों के माध्यम से वैदिक यज्ञ की प्रतीकात्मक व्याख्या करता है। वराह कथा में पृथ्वी केवल अधिकार का क्षेत्र नहीं, जीवन का आधार है जिसे संकट से उठाया जाता है। उसका उद्धार और उस पर सृष्टि के क्रम का फिर सम्भव होना कथा का मुख्य उद्देश्य है।
स्रोत और पाठ-संस्करण

स्रोताधारित स्वतन्त्र हिन्दी रूपान्तरण; मूल श्लोकों का अक्षरशः अनुवाद नहीं। https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83_%E0%A5%A9/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%A7%E0%A5%A9&oldid=261243 https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83_%E0%A5%A9/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%A7%E0%A5%AF&oldid=335503