व्रत कथा · देवनागरी पाठ
छठ व्रत कथा
सन्दर्भ और पाठ-परम्परा सहित हिन्दी कथात्मक परिचय।
स्रोत: स्रोत-सन्दर्भ सहित Divyadindarshan का हिन्दी रूपान्तरण · संदर्भ पाठ
छठ व्रत कथा — हिन्दी रूपान्तरण
छठ के साथ सूर्योपासना और षष्ठी देवी की आराधना जुड़ी है। अलग क्षेत्रों में राम-सीता, कर्ण और द्रौपदी से सम्बन्धित लोककथाएँ भी सुनाई जाती हैं। यहाँ देवीभागवत में आने वाला राजा प्रियव्रत और षष्ठी देवी का प्रसंग कथात्मक रूप में लिया गया है।
राजा प्रियव्रत और रानी मालिनी सन्तान के लिए दुखी थे। अनुष्ठान के बाद पुत्र हुआ, लेकिन वह जीवित नहीं रहा। राजा गहरे शोक में थे। तभी दिव्य देवी प्रकट हुईं। उन्होंने अपना परिचय षष्ठी के रूप में दिया, जो बालकों के संरक्षण से सम्बन्धित देवी मानी जाती हैं।
राजा ने प्रार्थना की। कथा में देवी की कृपा से बालक को जीवन मिलता है। उन्होंने अपनी पूजा की परम्परा स्थापित करने का सन्देश दिया। आगे जन्म के बाद की षष्ठी तथा बच्चों के मंगल से जुड़ी उनकी उपासना का वर्णन आता है।
यह षष्ठी देवी की पुराणकथा है; आधुनिक छठ के चारों दिनों की प्रत्येक रीति इसी एक अध्याय में दी गई है, ऐसा दावा नहीं किया गया है। छठ की लोकपरम्परा में डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य, परिवार का सहयोग और कृतज्ञता का विशेष स्थान है।
स्रोत और पाठ-संस्करण
Divyadindarshan का स्वतन्त्र हिन्दी रूपान्तरण; उद्धृत स्रोतों के प्रसंग/परम्परा पर आधारित। https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%80%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%AE%E0%A5%8D/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%83_%E0%A5%A6%E0%A5%AF/%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%83_%E0%A5%AA%E0%A5%AC&oldid=306861