व्रत कथा · देवनागरी पाठ

वट सावित्री व्रत कथा

स्रोताधारित हिन्दी कथारूपान्तरण। मूल ग्रन्थ के प्रसंग और इस संस्करण का सन्दर्भ साथ दिया गया है।

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स्रोत: मूल ग्रन्थ-सन्दर्भ सहित Divyadindarshan का हिन्दी कथारूपान्तरण · संदर्भ पाठ

सावित्री और सत्यवान की कथा — हिन्दी कथारूपान्तरण

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राजकुमारी सावित्री ने वन में रहने वाले सत्यवान को अपना जीवनसाथी चुना। नारद ने बताया कि सत्यवान गुणवान हैं, लेकिन उनकी आयु अल्प है। सावित्री अपने निर्णय पर स्थिर रहीं। विवाह के बाद उन्होंने सत्यवान और उनके माता-पिता की सेवा करते हुए वन का सरल जीवन स्वीकार किया। निर्धारित दिन निकट आने पर सावित्री ने संयम और प्रार्थना की। वे सत्यवान के साथ वन गईं। काम करते समय सत्यवान अस्वस्थ हुए और उनका सिर सावित्री की गोद में था। यम उनके प्राण लेकर चले तो सावित्री भी पीछे-पीछे चलीं। यम ने उन्हें लौटने को कहा। सावित्री ने धर्म, सत्संग और जीवनसाथी के प्रति निष्ठा पर विचारपूर्ण बातें कहीं। उनके वचनों से प्रसन्न होकर यम ने वर दिए। सावित्री ने अपने ससुर की दृष्टि और राज्य, पिता के वंश की वृद्धि तथा सत्यवान से अपनी सन्तति की कामना की। अन्तिम वर को सत्य करने के लिए सत्यवान का जीवित रहना आवश्यक था। यम ने सावित्री की बुद्धि और निष्ठा का सम्मान किया और सत्यवान को जीवन लौटा दिया। वे दोनों आश्रम लौटे, जहाँ परिवार को सुखद परिवर्तन का समाचार मिला। महाभारत की इस कथा में सावित्री धैर्य के साथ संवाद करने वाली सक्रिय और विवेकशील पात्र हैं।
स्रोत और पाठ-संस्करण

स्रोताधारित स्वतन्त्र हिन्दी रूपान्तरण; मूल श्लोकों का अक्षरशः अनुवाद नहीं। https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%AE%E0%A5%8D-03-%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%95%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5-297&oldid=51958 https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%AE%E0%A5%8D-03-%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%95%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5-298&oldid=402190 https://sa.wikisource.org/w/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%AE%E0%A5%8D-03-%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%95%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5-299&oldid=51963