व्रत कथा · देवनागरी पाठ
मंगलवार व्रत कथा
सन्दर्भ और पाठ-परम्परा सहित हिन्दी कथात्मक परिचय।
स्रोत: स्रोत-सन्दर्भ सहित Divyadindarshan का हिन्दी रूपान्तरण · संदर्भ पाठ
मंगलवार व्रत कथा — हिन्दी रूपान्तरण
मंगलवार की एक प्रचलित लोकव्रतकथा में एक दम्पति सन्तान की इच्छा रखते थे। स्त्री श्रद्धा से हनुमान का स्मरण और मंगलवार का व्रत करती थी। एक दिन नियत भोजन तैयार न हो पाने पर उसने मन में संकल्प रखा कि वह अपनी श्रद्धा और नियम को नहीं छोड़ेगी।
कथा में हनुमान उसके सामने प्रकट होकर प्रसन्नता व्यक्त करते हैं और बालक प्रदान करते हैं। बालक का नाम मंगल रखा जाता है। पति लौटता है तो बिना पूरी बात समझे पत्नी पर सन्देह करता है। उसके मन का अविश्वास परिवार के लिए बड़ा दुख बन जाता है।
वह बालक को हटाने का प्रयास करता है, लेकिन बालक फिर माँ के पास पहुँच जाता है। रात्रि में हनुमान पति को दर्शन देकर घटना का अर्थ समझाते हैं। उसे अपनी भूल और अनुचित सन्देह का बोध होता है। वह पत्नी से क्षमा माँगता है और परिवार फिर साथ रहता है।
यह लोकप्रचलित आस्थाकथा का रूपान्तरण है। इसके केन्द्र में भक्ति के साथ विश्वास, सत्य और बिना समझे आरोप लगाने की भूल भी है। सन्तान या किसी अन्य मनोकामना की निश्चित प्राप्ति का वादा इस कथा से नहीं निकाला गया है।
स्रोत और पाठ-संस्करण
Divyadindarshan का स्वतन्त्र हिन्दी रूपान्तरण; उद्धृत स्रोतों के प्रसंग/परम्परा पर आधारित। https://www.drikpanchang.com/vrat-katha/weekdays/mangalavara/hanumana-mangalavara-vrat-katha.html?lang=hi