देवी कथा · देवनागरी पाठ
माँ बगलामुखी की कथा
सन्दर्भ और पाठ-परम्परा सहित हिन्दी कथात्मक परिचय।
स्रोत: स्रोत-सन्दर्भ सहित Divyadindarshan का हिन्दी रूपान्तरण · संदर्भ पाठ
माँ बगलामुखी की कथा — हिन्दी रूपान्तरण
बगलामुखी को महाविद्या-परम्परा में पीताम्बरा के रूप में स्मरण किया जाता है। पीतवर्ण, स्थिरता और वाणी को रोकने की प्रतीकात्मक छवि उनकी उपासना में महत्त्वपूर्ण है। यह कथात्मक परिचय उनकी संस्कृत स्तुति में वर्णित स्वरूप पर आधारित है।
उनकी स्तुतियों में ऐसा रूप आता है जो अहंकार, आक्रामक वाणी और विक्षोभ को स्थिर करता है। भक्त पीताम्बरधारिणी देवी के सामने अपना भय, क्रोध और चित्त की अस्थिरता रखता है। इस परिचय में स्तम्भन को किसी अन्य व्यक्ति पर नियंत्रण पाने की व्यावहारिक विधि बनाकर नहीं दिया गया है।
देवी के हाथ में गदा और विरोधी की जिह्वा रोकने की छवि को परम्परा वाक्शक्ति तथा संयम से जोड़ती है। केवल शत्रु की कल्पना करने के बजाय अपनी असत्य, कटु और हानिकारक वाणी को रोकने का आत्मचिन्तन भी उससे लिया जा सकता है।
यह स्तुति-आधारित कथात्मक परिचय है। इसे किसी अनिश्चित पुराण-सन्दर्भ के नाम पर पूरी प्रामाणिक उद्भवकथा बताकर प्रस्तुत नहीं किया गया है। मूल स्तुति का स्रोत साथ दिया गया है, जिससे पाठक परिचय और पारम्परिक संस्कृत पाठ का अन्तर देख सकें।
स्रोत और पाठ-संस्करण
Divyadindarshan का स्वतन्त्र हिन्दी रूपान्तरण; उद्धृत स्रोतों के प्रसंग/परम्परा पर आधारित। https://sanskritdocuments.org/doc_devii/bagalAmukhIstotram.html