देवी कथा · देवनागरी पाठ

माँ वैष्णो देवी की कथा

सन्दर्भ और पाठ-परम्परा सहित हिन्दी कथात्मक परिचय।

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स्रोत: स्रोत-सन्दर्भ सहित Divyadindarshan का हिन्दी रूपान्तरण · संदर्भ पाठ

माँ वैष्णो देवी की कथा — हिन्दी रूपान्तरण

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त्रिकूट पर्वत के पास हंसाली गाँव में श्रीधर नामक भक्त रहते थे। वैष्णो देवी की प्रचलित लोकपरम्परा में वे देवी की सेवा करना चाहते थे, पर उनके साधन सीमित थे। एक कन्या ने उन्हें भण्डारा करने की प्रेरणा दी। श्रीधर ने आसपास के लोगों और साधुओं को निमन्त्रण दिया। निर्धारित दिन बहुत लोग आए। श्रीधर चिन्तित थे कि भोजन और स्थान कैसे पर्याप्त होंगे। कथा के अनुसार देवी की कृपा से सबका सत्कार हुआ। कन्या के रूप में वैष्णवी सेवा करती रहीं। भैरोंनाथ ने उनके स्वरूप को जानने का प्रयास किया और आगे उनका पीछा किया। वैष्णवी त्रिकूट की ओर गईं। परम्परा में बाणगंगा, चरणपादुका और अर्द्धकुँवारी जैसे स्थान उनकी यात्रा और साधना से जुड़े हैं। अन्ततः पवित्र गुफा के समीप भैरों का सामना हुआ। देवी ने उसे परास्त किया। पश्चात्ताप करने पर उसे भी क्षमा और तीर्थयात्रा से जुड़ा सम्मान मिला। श्रीधर को दर्शन में गुफा का मार्ग मिला। उन्होंने वहाँ पहुँचकर माता की पिण्डियों की पूजा आरम्भ की। यह तीर्थ की लोकप्रचलित कथा है, जिसे श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड भी श्रीधर की परम्परा के रूप में प्रस्तुत करता है। इसका प्रिय भाव है कि सेवा की भावना सीमित साधनों से बड़ी हो सकती है।
स्रोत और पाठ-संस्करण

Divyadindarshan का स्वतन्त्र हिन्दी रूपान्तरण; उद्धृत स्रोतों के प्रसंग/परम्परा पर आधारित। https://www.maavaishnodevi.org/blog/story-pandit-sridhar https://maavaishnodevi.org/about-shrine