देवी कथा · देवनागरी पाठ
माँ काली की कथा
सन्दर्भ और पाठ-परम्परा सहित हिन्दी कथात्मक परिचय।
स्रोत: स्रोत-सन्दर्भ सहित Divyadindarshan का हिन्दी रूपान्तरण · संदर्भ पाठ
माँ काली की कथा — हिन्दी रूपान्तरण
देवीमाहात्म्य में जब शुम्भ और निशुम्भ के असुर देवी से युद्ध कर रहे थे, तब चण्ड और मुण्ड विशाल सेना लेकर आए। अम्बिका के क्रुद्ध मुख से भयानक तेज प्रकट हुआ और उससे काली का रूप सामने आया। यह रूप अन्याय के सामने देवी की प्रचण्ड शक्ति का प्रतीक है।
काली ने चण्ड-मुण्ड को परास्त किया। अम्बिका ने उन्हें चामुण्डा नाम से सम्बोधित किया। आगे रक्तबीज आया। उसकी विशेषता थी कि रक्त की बूँद भूमि पर गिरते ही उसके समान दूसरा असुर उत्पन्न हो जाता था। केवल बार-बार प्रहार करने से समस्या बढ़ रही थी।
चण्डिका ने काली को भूमि पर रक्त गिरने से रोकने को कहा। काली ने ऐसा किया और देवी ने रक्तबीज को परास्त किया। इस प्रकार युद्ध की कठिनाई को समझकर उसका मूल कारण रोका गया।
देवी का यह उग्र रूप भक्तों के लिए मातृशक्ति का ही पक्ष माना जाता है। इस कथानक में काली को केवल क्रोध का रूप समझना अधूरा होगा; वे संकट को पहचानकर उसका सामना करने वाली शक्ति हैं। शिव पर चरण पड़ने और जीभ बाहर आने का लोकप्रिय चित्रात्मक प्रसंग अलग कथापरम्परा का है, उसे देवीमाहात्म्य के इन अध्यायों में नहीं मिलाया गया है।
स्रोत और पाठ-संस्करण
Divyadindarshan का स्वतन्त्र हिन्दी रूपान्तरण; उद्धृत स्रोतों के प्रसंग/परम्परा पर आधारित। https://sanskritdocuments.org/doc_devii/durga700.html