देवी कथा · देवनागरी पाठ

माँ विंध्यवासिनी की कथा

सन्दर्भ और पाठ-परम्परा सहित हिन्दी कथात्मक परिचय।

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स्रोत: स्रोत-सन्दर्भ सहित Divyadindarshan का हिन्दी रूपान्तरण · संदर्भ पाठ

माँ विंध्यवासिनी की कथा — हिन्दी रूपान्तरण

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देवीमाहात्म्य में देवताओं की स्तुति के बाद देवी भविष्य में होने वाले अपने प्राकट्यों का आश्वासन देती हैं। उसी प्रसंग में वे नन्दगोप के घर यशोदा से जन्म लेने और विन्ध्याचल में निवास करने की बात कहती हैं। विन्ध्यवासिनी नाम का अर्थ है विन्ध्य में निवास करने वाली देवी। भागवत के कृष्णजन्म प्रसंग में वसुदेव कृष्ण को गोकुल पहुँचाकर यशोदा की बालिका को मथुरा लाते हैं। कंस उस बालिका को मारना चाहता है, पर वह उसके हाथ से छूटकर दिव्य रूप में प्रकट होती है। वह बताती है कि कंस का संहार करने वाला अन्यत्र जन्म ले चुका है। देवी की योगमाया और विन्ध्य-निवास की परम्पराओं का सम्बन्ध आगे स्थानीय तीर्थकथाओं में मिलता है। आज विन्ध्याचल का प्रसिद्ध मन्दिर उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर क्षेत्र में है। स्थानीय उपासना में विन्ध्यवासिनी, अष्टभुजा और कालीखोह की यात्रा विशेष महत्त्व रखती है। इस रूपान्तरण में मूल ग्रन्थ का आश्वासन, कृष्णजन्म का प्रसंग और स्थानीय तीर्थपरम्परा अलग-अलग पहचाने गए हैं। इससे देवी का स्वरूप समझने में सहायता मिलती है और अलग कथाओं के विवरण बिना भेद किए एक ही घटना में नहीं मिलते।
स्रोत और पाठ-संस्करण

Divyadindarshan का स्वतन्त्र हिन्दी रूपान्तरण; उद्धृत स्रोतों के प्रसंग/परम्परा पर आधारित। https://sanskritdocuments.org/doc_devii/durga700.html https://mirzapur.nic.in/tourist-place/vindhyachal-dham/