देवी कथा · देवनागरी पाठ
महिषासुर मर्दिनी की कथा
सन्दर्भ और पाठ-परम्परा सहित हिन्दी कथात्मक परिचय।
स्रोत: स्रोत-सन्दर्भ सहित Divyadindarshan का हिन्दी रूपान्तरण · संदर्भ पाठ
महिषासुर मर्दिनी की कथा — हिन्दी रूपान्तरण
महिषासुर ने देवताओं को परास्त करके स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। देवता अपनी स्थिति लेकर ब्रह्मा, विष्णु और शिव के पास गए। उनके तेज तथा अन्य देवताओं के तेज से एक महान देवी का रूप प्रकट हुआ। देवताओं ने उन्हें अपने-अपने अस्त्र और आभूषण प्रदान किए।
देवी के सिंहनाद से असुरों की सेना विचलित हुई। महिषासुर ने अपने सेनापतियों और विशाल सेना को युद्ध के लिए भेजा। देवी और उनकी शक्तियों ने उन सेनाओं का सामना किया। महिषासुर कभी महिष, कभी सिंह, कभी पुरुष और कभी गज का रूप लेकर युद्ध करता रहा।
देवी ने उसके बदलते रूपों का सामना किया। अन्त में जब वह महिषरूप से निकल रहा था, उन्होंने उसे परास्त किया। देवता प्रसन्न होकर स्तुति करने लगे। उन्होंने देवी को शक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, लज्जा और समस्त जीवों में स्थित सत्ता के रूप में नमस्कार किया।
देवी ने आवश्यकता पड़ने पर फिर सहायता करने का आश्वासन दिया। यह देवीमाहात्म्य के मध्यमचरित्र का कथात्मक रूपान्तरण है। माँ को महिषासुरमर्दिनी कहने का आधार इसी विजय से जुड़ता है। कथा में संयुक्त तेज से प्रकट शक्ति और अत्याचार के अन्त का भाव प्रमुख है।
स्रोत और पाठ-संस्करण
Divyadindarshan का स्वतन्त्र हिन्दी रूपान्तरण; उद्धृत स्रोतों के प्रसंग/परम्परा पर आधारित। https://sanskritdocuments.org/doc_devii/durga700.html