देवी कथा · देवनागरी पाठ

ललिता त्रिपुरसुंदरी की कथा

सन्दर्भ और पाठ-परम्परा सहित हिन्दी कथात्मक परिचय।

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स्रोत: स्रोत-सन्दर्भ सहित Divyadindarshan का हिन्दी रूपान्तरण · संदर्भ पाठ

ललिता त्रिपुरसुंदरी की कथा — हिन्दी रूपान्तरण

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ललिता त्रिपुरसुन्दरी श्रीविद्या-परम्परा में परम देवी के रूप में पूजित हैं। ब्रह्माण्डपुराण के ललितोपाख्यान में उनकी महिमा का वर्णन हयग्रीव और अगस्त्य के संवाद से जुड़ता है। सहस्रनाम में भी उनका चिन्मय स्वरूप, दिव्य नगर और शक्तिसेना का स्मरण मिलता है। कथानक में भण्डासुर के अत्याचार से देवताओं को संकट होता है। देवी की शक्तियाँ संगठित होती हैं। ललिता दिव्य रथ पर आरूढ़ होकर सेना का संचालन करती हैं। मन्त्रिणी, दण्डनाथा और अन्य शक्तियाँ इस युद्ध में अपनी-अपनी भूमिका निभाती हैं। भण्डासुर अनेक प्रकार से विरोध करता है। देवी के आयुध और उनकी सहायक शक्तियाँ बाधाओं का सामना करती हैं। अन्त में कामेश्वरास्त्र से भण्डासुर और उसका दुर्ग समाप्त होते हैं। देवता देवी की स्तुति करते हैं और व्यवस्था का पुनः स्थापन होता है। ललिता का अर्थ केवल युद्ध की उग्रता नहीं है। उनके नामों में करुणा, सौन्दर्य, चैतन्य और आनन्द के भाव भी आते हैं। यह ललितोपाख्यान का संक्षिप्त कथात्मक परिचय है; सहस्रनाम के मूल पाठ को इसके स्थान पर संक्षिप्त नहीं किया गया है—वह पुस्तकालय की स्तोत्र श्रेणी में अलग उपलब्ध है।
स्रोत और पाठ-संस्करण

Divyadindarshan का स्वतन्त्र हिन्दी रूपान्तरण; उद्धृत स्रोतों के प्रसंग/परम्परा पर आधारित। https://sanskritdocuments.org/doc_devii/lalitacomplete.html