आरती · देवनागरी पाठ
ॐ जय जगदीश हरे
पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी से सम्बद्ध भगवान जगदीश की लोकप्रचलित आरती।
स्रोत: पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी कृत 1870 का सार्वजनिक-डोमेन मूल पाठ; लोक-प्रचलित पाठांतर · संदर्भ पाठ
सम्पूर्ण आरती
ॐ जय जगदीश हरे। स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे। ॐ जय जगदीश हरे।
जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का।
स्वामी दुख बिनसे मन का। सुख संपत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का। ॐ जय जगदीश हरे।
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी।
स्वामी शरण गहूँ किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी। ॐ जय जगदीश हरे।
तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी।
स्वामी तुम अंतर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी। ॐ जय जगदीश हरे।
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
स्वामी तुम पालनकर्ता। मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता। ॐ जय जगदीश हरे।
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति। किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति। ॐ जय जगदीश हरे।
दीनबंधु दुखहर्ता, ठाकुर तुम मेरे।
स्वामी रक्षक तुम मेरे। अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे। ॐ जय जगदीश हरे।
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
स्वामी पाप हरो देवा। श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा। ॐ जय जगदीश हरे।
तन मन धन सब है तेरा, स्वामी सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा। ॐ जय जगदीश हरे।
स्रोत और पाठ-संस्करण
पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी, ॐ जय जगदीश हरे, लगभग 1870; लेखक का निधन 1881, मूल रचना सार्वजनिक डोमेन; लोक-प्रचलित पाठांतर समीक्षा हेतु।