आरती · देवनागरी पाठ
जय गणेश जय गणेश देवा
श्री गणेश की लोकप्रचलित पारम्परिक हिन्दी आरती।
स्रोत: पारम्परिक लोकप्रचलित आरती; मूल पाठ सार्वजनिक डोमेन · संदर्भ पाठ
सम्पूर्ण आरती
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
एकदन्त दयावन्त, चार भुजा धारी।
माथे सिन्दूर सोहे, मूसे की सवारी।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
पान चढ़े, फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
अन्धन को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
स्रोत और पाठ-संस्करण
पारम्परिक श्री गणेश आरती, लोकप्रचलित सार्वजनिक-डोमेन पाठ; 2026-09-30 को अनेक स्वतंत्र पाठों से पंक्ति-मिलान हेतु प्रस्तुत।